मेरा योजनाबद्ध जिंदगी और अनियोजित जिंदगी (आजाद जिंदगी)

 

सबकुछ ठीक था लेकिन जबसे शादी हुई तबसे पैसे का दिक्कत होना शुरू हो गया 2018 में शादी हुई और फिर 2019 में जॉब चली गई। उसके बाद आज तक 2026 तक जॉब नहीं की एक कोशिश की जॉब में रहने का लेकिन शादी होने के बाद जॉब में रह पाना मुश्किल था और काम का प्रेशर भी नहीं झेलना चाहता था। 2018 में मैं 12000/– महीने का कमाता था और सिर्फ मैं ही घर चलाता था। मैने उसी के आधार पर सोचा मुझे जिंदगी में अब कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि घर में मैं मालिक हूं और सभी लोग मुझे मानते है। और आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा। लेकिन कहा पता था कि मेरा भाई लोग मुझसे आगे निकल जाएगा और मैं पीछे छूट जाऊंगा। मेरे पीछे जाने का बस एक ही कारण है वो है अपने भाइयों को आगे बढ़ाना। उनलोगों की मदद करते करते आज मैं खुद की ताकत और खुद का 7 साल बर्बाद कर लिया। हालांकि सबकुछ वैसा ही हुआ जैसा मैने सोचा था जैसा मैने प्लान किया था मैने जॉब से छुटकारा दिलाकर बिज़नेस में सबको लगा दिया लेकिन खुद का 7 साल प्लान नहीं किया। लेकिन एक बात तो कभी छोटे काम करने का मन नहीं करता हमेशा सोचता हूं कि मैं कैसे कोई महान कार्य कर सकता हूं। और इसी कारण मैने अपनी पत्नी को लेकर कोई प्लान नहीं बनाया भाइयों की शादी को लेकर कोई प्लान नहीं बनाया। और न ही अपने बच्चों के बारे में कोई प्लान किया। जिसका नतीजा आज हमें देखने को मिल रहा है  जो प्लान था वो सेट हो गया जो प्लान नहीं किया तकलीफ के साथ गुजार रहा हूं। हर बार सोचता हूं कि अब से 2026 से अपनी जिंदगी में अपने बच्चों के बारे में प्लान करूंगा और अपनी पत्नी और अपने मा बाप को ध्यान में रखकर प्लान करूंगा। मैं खुद एनालाइज करूंगा कि मेरी पत्नी को क्या चाहिए मेरे मां पिता को क्या चाहिए। मेरे पापा को इनकम चाहिए जो वो मेरी मम्मी को लाके दे सके उसके पसंद की चीजें। मेरी पत्नी को इज्जत चाहिए और पैसे चाहिए ताकि वो सबके साथ खुश रह सके । और मुझे समाज में इज्जत चाहिए। जिस तरह हमलोग कोई प्लान नहीं करते है ट्रेन में सफर करने से पहले तो हमें जेनरल में जाना पड़ता है और तकलीफ के साथ पूरी मंजिल तय करना पड़ता है ठीक उसी तरह जो मैने 5 साल बिना योजना के चला हूं पूरा 5 साल तकलीफ में जिंदगी गुजारनी पड़ी। आज हमें ये भी याद आया कि शिव खेड़ा सर कहा करते थे प्लान करोगे तभी आजादी मिलेगी नहीं करोगे आज़ाद अभी रहोगे तो बाद में बंधन में बंध जाओगे। प्लान gives you freedom. लेकिन by नेचर मैं अजीब हूँ मै डरपोक भी हूं और मैं असफल भी हु। क्या मैं इतना सफल हो सकता हूँ। और मेरे लिए सफलता क्या है। जिस तरह बिखरे भारत के लोगों को चलाने के लिए संविधान बनाया गया है क्या ठीक उसी तरह हमलोग अपने जीवन का संविधान बना सकते हैं। अब ऐसा महसूस हो रहा हैं जैसे मुझे जेल में डाला जा रहा है दिमाग कैद नहीं होना चाहता है। संविधान बनाना है लेकिन सिर्फ पैसे का क्योंकि तुम अपने से बड़े को बर्दाश्त नहीं कर सकते हो। और इस दुनिया में सबसे ऊपर वो है जो सबसे ज्यादा पैसे वाला है और ये युद्ध शुरू हो गया है कि अगर तुम अपने आपको बड़ा महसूस करवाना चाहते हो तो तुम्हे इतना पैसा रखना होगा कि सबकी औकात तुम्हे छू नहीं पाए। और अब ये समझना है कि पूरी दुनिया की दौलत मेरे पास कैसे आएगा। इसका मतलब जो चीज बिकेगी मेरे पास होनी चाहिए। 

आज से मैं अपनी मां की सौगंध खाता हूँ। की दुनियां में जब तक जिऊंगा पूरी दुनिया में जितनी चीज बिकेगी सब मेरे दरवाजे से होकर जाएगी।

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